कन्याओं और स्त्रियों के शील की रक्षा सुनिश्चित कैसे हो?
उपाय १ · इतिहास का दृष्टान्तस्वेच्छारिणी न हों — रानी पद्मावती की कथा
रानी पद्मावती से भूल क्या हुई? रजोधर्म की अवस्था में पति का दर्शन किए बिना बाल खोलकर बाहर निकल गईं। असुर की दृष्टि उनपर पड़ गई।
पद्मावती जी उसे श्राप देने के लिए अग्रसर हुईं तो वह असुर बोला — "अब तुम मुझे श्राप नहीं दे सकतीं क्योंकि तुममें अब श्राप देने की क्षमता नहीं रही। तुम्हारा सतीत्व भंग हो चुका है।"
"पति मुख दर्शन किए बिना घर से बाहर आने पर तुमनें स्वयं पहले पाप किया जिसका लाभ मार्ग से जाते तुम्हें देखकर मैंने उठा लिया।"
उपाय २ · कटु सत्यसंघ में रहें — अकेलापन सबसे बड़ा खतरा
यदि आप ध्यान देंगे तो छोटी अबोध कन्याओं या स्त्रियों के साथ हुए दुष्कर्म का कारण अकेला रहना होता है। यह कटु सत्य है —
बड़े होकर ज्ञान और चेतना आने पर ज्ञात होता है जो हुआ था। स्वयं को दुर्बल, लाचार और दोषी मानकर जूँझती रहती हैं पर किसी से कहती नहीं है।
स्वर्गलक्ष्मी द्रौपदी जी का चीर हरण होने का कारण था — संघबल न उपस्थित होना अथवा उनका अकेला पड़ जाना। यदि सभा में अन्य स्त्रियों की उपस्थिति होती तो ऐसा न होता। यहाँ संघबल का अर्थ है स्त्रियों का संघ।
इतिहास की वीरांगनाएँसंघ से संग्राम और जौहर — दोनों संभव
एक से अधिक स्त्री होने पर या तो संग्राम होता है या जौहर — दोनों ही वीरता और शक्ति के सूचक हैं।
संघ के कारण वीरगाथा लिखी गई — एक साथ लड़ीं, इतिहास बना।
जौहर करके सतीत्व रक्षा का वृहत उदाहरण प्रस्तुत किया।
सभा में अन्य स्त्रियाँ न होने से अपमान हुआ — संघ होता तो नहीं होता।
कलियुग का यही रहस्य है। इस काल में संघ के बिना अधिक समय तक व्यक्ति टिक नहीं सकता। यह किसके कारण संभव हुआ? स्त्रियों के संघ।
इसी के आधार पर पूज्यपाद ने 'आनंद वाहिनी' का गठन किया। यह गोवर्धन मठ द्वारा संचालित — पूर्णतः कन्याओं और स्त्रियों को समर्पित और उनके उत्कर्ष हेतु संगठन है। उद्देश्य है स्त्रियों का संघ बनाना जिससे भविष्य में कभी मातृशक्ति की गरिमा पर आँच न आए।
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