वैदिक सिद्धान्त · गुप्त बल

हमारे पास कौनसा गुप्त बल है जिससे विश्व पुनः हमारे अनुगत होगा?

लौकिक दृष्टान्तपरिणाम का महत्व — कोयला और यूरेनियम

लौकिक दृष्टि से सदैव परिणाम का महत्व मान्य है। कंप्यूटर के बड़े परिमाण नहीं अपितु कार्य का महत्व होता है।

🪨
कोयला
३,००० किलोग्राम

सरल — घर-घर जलाकर उपयोग में लिया जा सकता है।

24,000 MWh
⚛️
यूरेनियम
१ ग्राम

दुर्लभ — न्यूक्लियर रिएक्टर का निर्माण अति कठिन।

24,000 MWh
दोनों से समान ऊर्जा। किंतु यूरेनियम की शक्ति असीम सघन है — मात्रा नहीं, तत्व की शक्ति मायने रखती है।
॥ ॐ ॥

मन का स्वभाव'मैं' को वास्तव में क्या चाहिए?

मन आनन्द का भोक्ता होता है। सुंदर स्त्री-पुरुष, चटपटे भोजन, बड़े वाहन आदि में प्रीति-प्रवृत्ति क्यों? — सुख के लिए। हर जीव सुख चाहता है परन्तु स्वस्थ विधा ज्ञात नहीं होने के कारण वह तुच्छ पदार्थों में सुख का अनुसंधान करता रहता है।

👫

हर स्त्री-पुरुष पसंद क्यों नहीं आता?

मनोवांछित सुख नहीं जान पड़ता
🍽️

हर भोजन पसंद क्यों नहीं आता?

मनोवांछित स्वाद नहीं होता
🚗

हर वाहन पसंद क्यों नहीं आता?

मनोवांछित प्रतिष्ठा नहीं मिलती
✨ निष्कर्ष

इससे स्पष्ट सिद्ध होता है कि 'मैं' को वास्तव में स्त्री-पुरुष, भोजन, वाहन आदि नहीं चाहिए। 'मैं' को केवल आनन्द चाहिए। यही वह गुप्त तत्व है जिसके लिए विश्व भारत की ओर आएगा।

॥ ॐ ॥

वेद और ब्राह्मणआनन्द का मार्ग कौन बतलाएगा?

इसी आनन्द के लिए विश्व भारत आएगा। इस आनन्द को वेद ने कहा है। वेद की प्रतिष्ठा ब्राह्मण में होती है — इसलिए आनन्द को पाने का मार्ग विप्र-ब्राह्मण बतलाते हैं।

आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात्

आनन्द ही ब्रह्म है।

— तैत्तिरीयोपनिषद्
यही हमारा गुप्त बल है

जब तक आनन्द है तब तक हम सनातन धर्मावलम्बी विजयी हैं — अर्थात् सदैव विजयी हैं।

कोयला बाहर से आता है और समाप्त हो जाता है। आनन्द भीतर से आता है और कभी समाप्त नहीं होता। यही वैदिक सिद्धान्त का वह अनंत यूरेनियम है जिसके सामने विश्व का कोई भी बल टिक नहीं सकता।

॥ हर हर महादेव ॥
प्रस्तुति

धर्मराज्य भारतवर्ष

वैदिक सिद्धान्त · आनन्द-तत्व · सनातन विजय

Ayush Sharma

Author