जगद्गुरु · पुरी पीठाधीश्वर

जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने क्या किया?

आप क्या अपेक्षा करते हैं?
अस्पताल खोलें
फैक्ट्रियाँ लगाएं
तलवार लेकर सड़कों पर घूमें
भंडारे में हलवा-पूड़ी बाटें

शिवावतार आदिशंकराचार्य जी ने चार पीठों की उद्भावना तब की थी जब बौद्धों के शासन के कारण भारत दिशाहीन हो गया था। भविष्य में ऐसी परिस्थिति न उत्पन्न हो उसके लिए चार शंकराचार्य प्रस्थापित किए गए।

बृहस्पति और इंद्र का दृष्टान्तनेतृत्व के बिना राज्य का पतन

📖 पौराणिक दृष्टान्त

बृहस्पति जी इंद्रदेव के गुरु हैं। एक बार दरबार में उनका तिरस्कार होने पर बृहस्पति जी ने न वाणी का प्रयोग किया, न शस्त्र का — बस अपना नेतृत्व प्रदान करना बंद कर दिया। उसके बाद इंद्रदेव को अपना महल छोड़कर भागना पड़ा। असुरों ने आक्रमण कर राज्य हड़प लिया। अंत में बृहस्पति जी से क्षमायाचना की और तब सुशासन हुआ।

यदि अपने गुरु छोड़कर किसी और को गुरु मान लो — ह्रास ही होगा। शासकों और राजनेताओं का कर्तव्य है कि वे शंकराचार्य जी के पास जाकर उनका नेतृत्व लें।

गुरु-परंपराश्रीमन्नारायण से वर्तमान व्यासपीठ तक

दिव्य गुरु-परंपरा — १ अरब ९७ करोड़ वर्ष पुरानी
श्रीमन्नारायण
ब्रह्मा जी
वशिष्ठ जी
शक्ति महर्षि जी
पराशर जी
वेद व्यास जी
सुखदेव जी
गौडपादाचार्य जी
गोविंद भगवत्पादाचार्य जी
शिवावतार आदिशंकराचार्य जी
वर्तमान व्यासपीठ — १४५वें पूज्यपाद शंकराचार्य जी
॥ ॐ ॥

शंकराचार्य जी के कार्ययह मात्र कुछ ही कार्य हैं

गणित का विलुप्त ज्ञान प्रकट किया

४००० वर्ष पहले विलुप्त हो गया गणित का ज्ञान वेदों के सूत्रों से प्रकट किया। १०+ ग्रंथ गणित पर प्रकाशित। वेदों में से राजनीति, शिक्षा, अर्थ आदि के ज्ञान को अपने ग्रंथों में कलमबद्ध किया।

ISRO के वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन

चंद्रयान को लेकर ISRO के वैज्ञानिकों ने शंकराचार्य जी से अपनी गुत्थियाँ सुलझाईं।

विश्व बैंक को अर्थनीति का नेतृत्व

भारत का शासनतंत्र शंकराचार्य जी की उपेक्षा करता है किंतु विश्व बैंक विशेष रूप से आकर अर्थनीति और विश्व मानचित्र के भविष्य को लेकर नेतृत्व लेता है।

राम मंदिर — हस्ताक्षर न करके मस्जिद रोकी

नरसिंह राव जी के समय रामालय न्यास के गठन में पुरी पीठ के शंकराचार्य के हस्ताक्षर न करने के कारण मंदिर और मस्जिद दोनों नहीं बने। वाजपाई जी का भी साहस नहीं हुआ कि बिना सभी शंकराचार्यों की सहमति के निर्माण आरम्भ करें।

गोधरा काण्ड — हिंदुओं का मनोबल उद्दीप्त किया

गोधरा काण्ड के समय जले हुए रेल डिब्बे का दौरा करने गए, मृतकों के प्रति शोक प्रकट किया और हिंदुओं का मनोबल उद्दीप्त किया।

१९६६ गौहत्या आंदोलन का नेतृत्व

गौहत्या के विरुद्ध १९६६ के आंदोलन में नेतृत्वकारी रहे। मोरारजी देसाई के अपना वचन न निभाने पर उनके निवास पर जाकर प्रतिबद्धता पूरी करने को कहा।

इंदिरा गांधी के काल में जेल

इंदिरा गांधी के शासनकाल में गौहत्या के विरुद्ध आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल में भी बंद रहे।

जगन्नाथ पुरी रथयात्रा परंपरा पुनःस्थापित की

जगन्नाथ पुरी में कई सौ वर्षों से विलुप्त रथयात्रा परंपरा को पुनः आरम्भ करवाया। हाई कोर्ट ने भी कहा कि शंकराचार्य धर्म के सबसे उच्च पदाधिकारी व न्यायाधीश होते हैं।

कारगिल युद्ध की ८ माह पूर्व भविष्यवाणी

भारत-पाकिस्तान १९९९ युद्ध से ८ महीने पूर्व कश्मीर क्षेत्र का निरीक्षण करके सिद्धि-बल से घोषणा की कि पाकिस्तान भारत पर आक्रमण करने वाला है।

१०
लिंगायत हिंदुओं को हिंदू धर्म से अलग होने से रोका

लिंगायत हिंदू पृथक न हो जाएं इसको लेकर आदिवासी क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं।

११
नेपाल को हिंदू राष्ट्र की ओर अग्रसर किया

नेपाल के वामपंथी प्रधानमंत्री की उपस्थिति में घोषणा की कि नेपाल सबसे पहला हिंदू राष्ट्र बनेगा। नेपाल के राजा कई वर्षों से शंकराचार्य जी से निजी मार्गदर्शन लेते आए हैं।

१२
किसान आंदोलन में पंजाब गमन

उत्तर भारत प्रवास के दौरान जब अचानक किसान आंदोलन बिगड़ा तब अनुसूचित रूप से पंजाब गए और कई दिन वहाँ जनता के बीच रहकर धरातल की स्थिति जानी।

१३
नकली शंकराचार्य का पर्दाफाश

अधोक्षजानंद नामक नकली शंकराचार्य — जिसके आतंकवादियों से सम्बन्ध हैं और हाई कोर्ट द्वारा ओडिशा से बहिष्कृत है — के विषय में व्यक्तिगत रूप से योगी जी, अमित शाह जी और मोहन भागवत जी को सूचित किया।

॥ ॐ ॥

पद का स्वरूपहाथी से हल नहीं जुतवाया जाता

शंकराचार्य जी का पद मार्गदर्शन और नेतृत्व प्रदान करने का है — न कि कार्यकर्ता की भाँति स्वयं सेवा करने का। जैसे राम जी के राजगुरु वशिष्ठ जी ने कितने लोगों को रोजगार दिया, कितने चिकित्सालय खोले? यह अत्यंत मूर्खता है।

शंकराचार्य जी का दायित्व होता है राजनेताओं पर शासन करने का। राजनीति अराजक तत्वों की बपौती न बन जाए — यह देखना भी शंकराचार्य जी का दायित्व है।

🏛 स्वतंत्र मठ

भारत में केवल गोवर्धन मठ ही एकमात्र ऐसा मठ है जो सरकार के नियंत्रण में नहीं है। अतः स्वतंत्र एस्टेट घोषित है। आदित्य वाहिनी और आनंद वाहिनी शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित संस्थाएं हैं जो सेवा कार्य करती हैं।

निष्कर्ष

मार्गदर्शन, ज्ञान और भक्ति में शंकराचार्य जी की तुलना नहीं। यदि आप शिक्षक हैं तो शंकराचार्य जी से नेतृत्व लें कि विशुद्ध पद्धति का निरोपण कैसे हो। यदि रक्षा विभाग में हैं तो जानें क्षात्र धर्म की प्रतिष्ठा कैसे हो। व्यापारी हैं तो अर्थ के सूत्रों को जानें। अपने धर्म की सीमा का अतिक्रमण करके कभी समाज उन्नत नहीं हो सकता।

प्रस्तुति

धर्मराज्य भारतवर्ष

जगद्गुरु · पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य

Ayush Sharma

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