मातृशक्ति · शील-रक्षा

कन्याओं और स्त्रियों के शील की रक्षा सुनिश्चित कैसे हो?

स्वेच्छारिणी न हों
संघ में रहें

उपाय १ · इतिहास का दृष्टान्तस्वेच्छारिणी न हों — रानी पद्मावती की कथा

रानी पद्मावती से भूल क्या हुई? रजोधर्म की अवस्था में पति का दर्शन किए बिना बाल खोलकर बाहर निकल गईं। असुर की दृष्टि उनपर पड़ गई।

पद्मावती जी उसे श्राप देने के लिए अग्रसर हुईं तो वह असुर बोला — "अब तुम मुझे श्राप नहीं दे सकतीं क्योंकि तुममें अब श्राप देने की क्षमता नहीं रही। तुम्हारा सतीत्व भंग हो चुका है।"

"पति मुख दर्शन किए बिना घर से बाहर आने पर तुमनें स्वयं पहले पाप किया जिसका लाभ मार्ग से जाते तुम्हें देखकर मैंने उठा लिया।"

एक छोटी सी मर्यादा भंग होने के कितने दूरगामी घातक परिणाम हुए — उग्रसेन को मोहवश पुत्र का त्याग न करने पर कंस उत्पन्न हुआ। कंस के कारण त्राहि-त्राहि हो गई। श्रीकृष्ण भगवान को आना पड़ा उसका वध करने।
॥ ॐ ॥

उपाय २ · कटु सत्यसंघ में रहें — अकेलापन सबसे बड़ा खतरा

यदि आप ध्यान देंगे तो छोटी अबोध कन्याओं या स्त्रियों के साथ हुए दुष्कर्म का कारण अकेला रहना होता है। यह कटु सत्य है —

अधिकतम दुष्कर्म किसी परिचित द्वारा किए जाते हैं। अंधविश्वास करके माता-पिता अपनी बोधहीन बालिका को किसी के भी हाथ छोड़ देते हैं। घर से बाहर होने वाले कृत्यों में भी वाहन, सड़क आदि पर अकेले पाए जाना मुख्य कारण होता है।

बड़े होकर ज्ञान और चेतना आने पर ज्ञात होता है जो हुआ था। स्वयं को दुर्बल, लाचार और दोषी मानकर जूँझती रहती हैं पर किसी से कहती नहीं है।

📖 जगद्गुरु शंकराचार्य जी का वचन

स्वर्गलक्ष्मी द्रौपदी जी का चीर हरण होने का कारण था — संघबल न उपस्थित होना अथवा उनका अकेला पड़ जाना। यदि सभा में अन्य स्त्रियों की उपस्थिति होती तो ऐसा न होता। यहाँ संघबल का अर्थ है स्त्रियों का संघ।

इतिहास की वीरांगनाएँसंघ से संग्राम और जौहर — दोनों संभव

एक से अधिक स्त्री होने पर या तो संग्राम होता है या जौहर — दोनों ही वीरता और शक्ति के सूचक हैं।

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रानी लक्ष्मीबाई + झलकारी बाई

संघ के कारण वीरगाथा लिखी गई — एक साथ लड़ीं, इतिहास बना।

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रानी पद्मावती व अन्य स्त्रियाँ

जौहर करके सतीत्व रक्षा का वृहत उदाहरण प्रस्तुत किया।

🪔
द्रौपदी — संघ का अभाव

सभा में अन्य स्त्रियाँ न होने से अपमान हुआ — संघ होता तो नहीं होता।

संघे शक्ति कलौ युगे

कलियुग का यही रहस्य है। इस काल में संघ के बिना अधिक समय तक व्यक्ति टिक नहीं सकता। यह किसके कारण संभव हुआ? स्त्रियों के संघ।

॥ ॐ ॥
पूज्यपाद की स्थापना · गोवर्धन मठ
आनंद वाहिनी

इसी के आधार पर पूज्यपाद ने 'आनंद वाहिनी' का गठन किया। यह गोवर्धन मठ द्वारा संचालित — पूर्णतः कन्याओं और स्त्रियों को समर्पित और उनके उत्कर्ष हेतु संगठन है। उद्देश्य है स्त्रियों का संघ बनाना जिससे भविष्य में कभी मातृशक्ति की गरिमा पर आँच न आए।

प्रस्तुति

धर्मराज्य भारतवर्ष

मातृशक्ति · शील-रक्षा · आनंद वाहिनी

Ayush Sharma

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